Saturday, May 30, 2009

जातिवाद का ज़हर

पिछले दिनों पंजाब जिस आग में जला उसकी चिंगारी विएना में नहीं भड़की बल्की ज्वालामुखी का ये लावा सदियों पुराना है। जातिवाद की आग तो बस गाहेबगाहे भड़कती रहती है। ...क़ैसर रज़ा

नफरत की ये चिंगारी यूं ही नहीं भड़की, बल्कि इस आग के पीछे जातिवाद का जहर घुला हुआ है। विएना में सिख गुरु की मौत की वजह से पूरा पंजाब धधक रहा है। हिंसा का लावा तब फूटा जब सिख समुदाय के एक वर्ग के लोगों ने विएना में डेरा सच खंड के अनुयायियों पर हमला बोल दिया। इस हमले में एक दलित सिख धर्मगुरु संत राम नंद की मौत हो गई। दरअसल डेरा सच्च खंड दलित सिखों का संगठन है। अमूमन ये माना जाता है कि सिखों में जतिवाद जैसी कोई बात नहीं है। लेकिन हकीकत ये है कि जतिवाद की खाई सिख समुदाय में काफी पुरानी है। डेरा सच खंड की स्थापना गुरु रविदास ने की थी। गुरु रविदास चौदवीं शताबदी के दलित जाति के गुरु थे। जिन्हें सवर्ण सिख गुरु नहीं मानते। कुछ जानकार डेरा सच खंड को सिख धर्म से अलग मानते हैं और इसे रविदास धर्म कहते हैं। लेकिन कई चीजे हैं जिनकी वजह से डेरा सचखंड को सिख समुदाय से अलग नहीं माना जा सकता है। डेरा सच खंड के लोग भी गुरु ग्रंथ साहिब में यकीन करते हैं। इस समुदाय के लोगों की दलील है कि रविदास वाणी यानी गुरु रविदास के श्लोक श्री गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल है लिहाजा इसकी चर्चा होनी चाहिए। सवर्ण और दलित सिखों के इसी गतिरोध का नतीजा है कि पूरा पंजाब नफरत की आग में जल रहा है। और इस संघर्ष की वजह से लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। पंजाब में जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। कई रेल गाड़िया रद्द कर दी गई हैं। पिछले दिनों राजस्थान समेत कई प्रदेश जातिवाद की आग में जले थे। जब गुर्जर औऱ मीणा समुदाय के बीच टकराव पैदा हुआ था। जातिवाद की ये आग किसी एक धर्म में नहीं बल्कि सभी धर्मों में मौजूद है। एकता की बात करने वाले ईसाई धर्म में भी दलित और गैर दलित की भावना कायम है। कई चर्चों में तो दलित ईसाईयों से गैर बराबरी का आलम ये है कि उनके बैठने के लिए अलग जगह, पीने के लिए अलग पानी का गिलास और दफन करने के लिए कब्रिस्तान भी अलग है। ऐसे में ब्राह्मणवादी व्यवस्था के कथित जुल्म का शिकार दलित धर्मपरिवर्तन करके भी दलित बने हैं। गोवा में जो ब्राह्मण ईसाई बने वो बामोन्न हो गए, छत्रिय चाटिम और वैश्य गोड्डोस के नाम से जाने जाते हैं। लेकि शूद्र से धर्म परिवर्तन करके ईसाई बने लोग शूरिद्रस ईसाई कहलाते हैं। केरल में भी हालात ऐसे ही है। इस्लाम धर्म में भी एकता की बात होती है। इस्लाम की बुनियद भी बराबरी के बिना पर कायम हुई। इसी लिए कहा गया है कि एक ही सफ में सब खड़े हो गए महमूदो आयाज, ना कोई बंदा रहा ना कोई बंदा नवाज लेकिन हकीकत ये है दूसरे धर्मों की तरह देश में मुस्लिम समाज भी जात बिरादरी में बंटा हुआ है। ऐसे में जातपात की ये दिवार अबतक खत्म नहीं हुई और गाहे बगाहे नफरत का मंजर हमारे सामने आ जाता है।

2 comments:

Anonymous said...

Hinduism is most corrupted and castist religion in yhe world.It is just like viruses which spread disease in all religion . Thanks god this religion could not spread outside India.

Anonymous said...

Wifi ke passward dusre ka kase jane