Monday, May 28, 2007

वक़्त के गाल पर थमा हुआ एक आंसू 'ताजमहल'

शेखर आनंद त्रिवेदी अदब व तहज़ीब के शहर लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं। मीडिया से काफी वक़्त से जुड़े हैं। समाज में होने वाली उठापटक पर इनकी पैनी नज़र रहती है। हर मुद्दे के जड़ तक जाना न सिर्फ इनकी आदत है बल्की जूनून भी। जुलाई महीने में दुनिया के अजूबा इमारतों के नाम का ऐलान होना है। जिसके लिए वोटिंग हो रही है। इस दौड़ में ताज भी शामिल है। शेखर जी ने ताज के इस इम्तेहान को काफी ख़ूबसूरती से पेश किया है।
वक़्त के गाल पर थमा हुआ एक आसूं। ताजमहल। इंसान की बनायी सबसे ख़ूबसूरत इमारत है ताजमहल। किसी की मोहब्बत की अमर दास्तान। ताजमहल। मुगलकाल का अज़ीमोशान शाहकार। ताजमहल। किसी की मौत पर बना मकबरा है ताजमहल। नदी का सबसे ख़ूबसूरत किनारा है ताजमहल। प्रेमियों के लिए इज़हारे जज्बात है ताजमहल। कहते हैं मोहब्बत के कई रंग होते हैं। मौत का सिर्फ एक। बहुत सारे रंग एक साथ पहिये पर घुमा दें तो सब सफेद नज़र आता है। ताज की संगमरमरी सफेद इमारत बेपनाह मोहब्बत के वो हज़ारों रंग समेटे है जो किसी की मौत के बाद बेरंग हुयी ज़िंदगी को तसल्ली देती है कि चलो तुम नहीं तुम्हारी यादें ही सही। ताजमहल जैसी मोहब्बत की निशानी दुनिया में दूसरी नहीं। शायद इसीलिए कहते हैं कि हर प्यार करने वाला शख्स एक बार ताजमहल देखने की ख्वाहिश ज़रुर रखता है। ताज की शान मे बहुत कुछ लिखा गया। बहुत कुछ गाया गया। फिल्में भी बनी। ताज के नाम पर बहुत कुछ बेचा गया। ताज के नाम पर बहुत कुछ ख़रीदा गया। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने जब ताज को देखा तो बोले दुनिया में दो ही तरह के लोग हैं एक वो जिन्होंने ताज को देखा है, एक वो जिन्होंने ताज को नहीं देखा। पाकिस्तान से भारत आए मुशर्रफ ने ताज को देख कर कहा मोहब्बत का ये मकबरा बेमिसाल है।
बाजारवाद के दौर में अनमोल ताज का अपना एक मोल है। दरअसल तरक्की पसंद दुनिया ने तकनीक के सहारे आज कई इमारते खड़ी कर ली। अब वो इतिहास की इमारतों को दफन करना चाहता है। वो अपनी क़ामयाबियों के नए अध्याय लिखना चाहता है। यहां भी वो तकनीक का सहारा ले रहा है। कोई एसएमएस, कोई मेल, कोई कॉल किसी इमारत को दुनिया का सबसे बड़ा अजूबा बनायेगी। वो इमारतें दुनिया के उन सात अजूबों में शुमार होगीं जिन्हें सबसे ज्यादा लोगों का वोट मिलेगा। कभी बीस हज़ार लोगों के चालीस हज़ार हाथों से बनी ताज की इमारत अनगिनत आंखों में बसी। अब उन्हीं यादों के सहारे वो अजूबा बन रही इमारतों से दो-दो हाथ कर रही है। ताजमहल की इमारत चाहती है कि भारत समेत दुनिया भर से उसके दीदार करने वाले उसे हैसला दें। अपनी यादों में बसे उसके नाम को इतनी बार लिखें कि बाकी सारे नाम छोटे पड़ जाएं। नयी अजूबा इमारतों की दौड़ में ताज पिछड़ा है। उसे अब तक केवल दो फीसदी वोट मिले हैं। इतिहास का आइना बनी कई इमारतें नए प्रेमियों के नाम से गुदी मिलती हैं। मेल और एसएमएस के दौर में प्रेमियों की चैटिंग खत्म नहीं होती। हर कोई चाहता है कि उसकी मोहब्बत अमर प्रेम की बेल चढ़ जाए। लेकिन ताज पिछड़ रहा है। उसे आपका समर्थन चाहिये। इसलिए नहीं कि वो इमारत अगर अजूबा ना रही तो खत्म हो जाएगी। बल्कि इस लिए कि अगर वो जीत गई तो भारत समेत दुनिया भर के प्रेमियों की मोहब्बत भी जीत जाएगी। दुनिया एक बार फिर जानेगी कि मोहब्बत अनमोल होती है। वो किसी भी दौर में कमज़ोर नहीं पड़ती। फिर भले ही वो किसी इमारत की शक्ल में वक़्त के गाल पर थमा हुआ एक आंसू ही क्यों ना हो।