Wednesday, May 16, 2007

यूपी में माया की माया...

मायावती उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर क़ाबिज हो चुकी हैं। ये पहला मौक़ा नहीं जब मायावती सूबे की मुख्यमंत्री बनी हैं। इससे पहले वो 1995, 1997 और 2003 में मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। लेकिन इसबार सत्ता का लुत्फ कुछ जुदा है। वजह साफ है बीएसपी को सरकार बनाने के लिए किसी बैसाखी की ज़रुरत नहीं पड़ी है। और वो सीना ठोक कर सरकार बना सकी है। उत्तर प्रदेश की कमान संभालते ही मायावती अपने ठेठ और सख्त अंदाज़ में दिखने लगी हैं। मायावती ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद राज्य को भयमुक्त, अपराधमुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के वादों को पूरा करने का संदेश दिया है। क्योंकि राज्य में फैली अराजकता और गुंडागर्दी के परेशान जनता के बीच मायावती इन्हीं मुद्दों को लेकर गयीं थीं। सत्ता संभालते के बाद मायावती ने अफसरों को भी चेतावनी दे दी है कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसके ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके ताज़ा उदाहरण राज्य में हो रहे अधिकारियों के तबादले हैं। बीएसपी को पार्टी गठित होने के तेईस साल बाद पूर्ण बहुमत हासिल हुआ है। और ये सब मुमकिन हो सका है शोसल इंजीनियरिंग के नुस्खे की बदौलत। जिसे मायावती ने अपने कुछ भरोसेमंद और अनुभवी सिपहसलारों के साथ मिलकर इस चुनाव में आजमाया। ओम् बुद्धाय नमः का जाप करने वाली माया ने न सिर्फ बहुजन की विचारधारा को सर्वजन के फलसफे में बदला, बल्कि हाथी नहीं गणेश हैं...ब्रम्हा-विष्णु-महेश हैं...का नारा देकर समूचे सियासी समीकरणों को ही उलट-पलट दिया और राजनीतिक पंडितों के गणित को ग़लत साबित कर दिया। प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में सोलह साल बाद किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत हासिल हो सका है। मायावती का भारी भरकम हाथी सब पर भारी पड़ गया। मुलायम और अमर सिंह के दावे फुस्स हो गए और पंजाब, उत्तराखंड चुनाव परिणाम की बीजेपी की उम्मीदों का कमल मुरझा गाया। मायावती ने अपने बूते सत्ता की बागडोर हासिल कर ली है। चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान मायावती ये कहती रही कि बहुमत हासिल करने की कूवत सिर्फ बीएसपी में है लेकिन उनकी बातों को जैसे किसी ने तवज्जो ही नहीं दी। हालांकि उन्हें सबसे बड़ी पार्टी ताक़त के रुप में उभरने वाली पार्टी के रुप में पेश किया जा रहा था लेकिन चुनाव में दिलचस्पी रखने वालों और मीडिया के लिए वो स्टार प्रचारक कतई नहीं थीं। जो लोग बीजेपी ओर कांग्रेस की पहेलियों में उलझे हुए थए उन्हें ये समझ में नही आ रहा कि मायावती ने इतनी बड़ी जीत कैसे हासिल कर ली।
उनके लिए तो राहुल गांधी किसी हीरो से कम नहीं थे और वे काग्रेस को पचास सीटें दिलवा रहे थे। लेकिन असलियत सामने है राहुल गांधी कांग्रेस के लिए कोई करिश्मा नहीं कर सके। ये पूरा चुनाव मायावती की कुशल राजनीति का निचोड़ साबित हुआ। स्वर्णों को साथ लेकर चलने की मायावती की रणनीति रंग लायी। मायावती का आकलन सही साबित हुआ कि बीएसपी पूर्ण बहुमत के साथ यूपी की सत्ता में आएगी।