Saturday, July 21, 2007

राष्ट्रपति पद की गरिमा और इस बार का चुनाव

अपनी पाती...
देश की पहली महिला राष्ट्रपती के तौर पर शपथ लेगीं। कांटे का माना जा रहा राष्ट्रपति चुनाव कमोबेश एकतरफा ही रहा। यानी अंतर्रत्माएं प्रतिभा पाटील के लिए बोलीं। भारतीय इतिहास में ये पहला मौका है जब किसी महिला को देश का पहला नागरिक बनने का मौका मिला है। ये न सिर्फ हिन्दुस्तान के करोड़ो महिलाओं के लिए गर्व की बात है बल्कि तमाम देश वालों के लिए खुशी का लम्हा भी। देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर प्रतिभा पाटील काबिज हो चुकी हैं। लेकिन इस बार के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान जिस तर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला वो पिछले चुनाव में देखने को नहीं मिला। इस गौरवमई पद के लिए जिस तरह से एक दूसरे पर किचड़ उछालने का दौर चला वो काफी दुखद रहा। देश के राजनेता राष्ट्रपति पद की गरिमा को धूल-धूसरित करने में जुटे रहे। आजाद भारत के छह दशक लंबे इतिहास में यह पहला मौका है, जब राष्ट्रपति नाम की संस्था पर सरेआम छींटाकशी की गयी। राष्ट्रपति पद के लिए जब से प्रतिभा पाटील का नाम यूपीए की तरफ से सामने आया तो कई सवाल खड़े हुए। किसी ने कहा-ये वफादारी का सिला है। तो किसी ने वामपंथियों को चित्त करने की चाल बताया। प्रतिभा पर तरह-तरह के आरोप भी लगे। एक सहकारी बैंक के खातेदारों के पैसे गबन करने का मामला उछला। तो चीनी मिल की खातिर बैंक से लिए करोड़ो रुपए के कर्ज को न लौटाने का आरोप भी लगा। इतना ही नहीं पाटील पर हत्या के आरोपी अपने भाई को बचाने का आरोप भी लगा। विपक्ष ने उन पर वेबसाइट भी लॉच किया। ऐसा नहीं कि आरोपों का दौर एक तरफा रहा। भैरो सिंह शेखावत पर भी जमकर कीचड़ उछाला गया। एनडीए पर पलटवार करते हुए यूपीए न शेखावत की नज़दीकियां संघ से बतायी। साथ ही उन्हें एक बागी सिपाही भी कहा गया। घोटालों के आरोप शेखावत पर भी लगे। दोनों तरफ से प्रतिभा और शेखावत के राजनीतिक और निजी ज़िन्दगी के सफर के अनछुए और विवादित पहलुओं को ढ़ूढ कर किताब की शक्ल दी गई और उसे सरेआम किया गया। बहरहाल देश के तेरहवें राष्ट्रपति का चुनाव अगर देश की पहली महिला राष्ट्रपति के लिए याद किया जाएगा तो इस चुनाव में की गयी छींटाकशी भी कभी ना भरने वाले जख़्म की तरह बनी रहेगी। हां ये उम्मीद जरुर की जा सकती है कि आगे के चुनावों में ये जख़्म फिर हरे ना किए जाएं।

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